जीवन जीने के दैनिक कर्म में व्यवहारिक बातचित चर्चाओं मैं अगर हम् सरलता ,कुशलता के साथ और साफ़-सुथरीं बात अगर हम् करेंगे तों ही अपने से जूड़े लोग़ो का साथ ले पायेंगे। क्योंकि आजकल किसी कों फर्क नहीं पड़ता आप …
अगर हम स्वयं के स्वास्थ्य व फिटनेस कों बनाए रखने के लिए समय नहीं निकाल पा रहें है या यें सोच कर मैं तों फिट हूँ क्यों शरीर कों समय दु यें भावना और सोच आज नहीं तों कल आपके …
प्रसन्न रहना हर इन्सान की महान उपलब्धि होती है। जो भी इन्सान प्रसन्न रहना हर हालत में सीख लेता है तों ही जीवन के हर पल का आनन्द ले पाता है। जैसे बीमारी के समय अगर हम मुस्कुराते रहते है तों …
समय और सयम दोनो का होना हमारे जीवन जीने के लिए अतिआवश्यक होता है समय और सयम दोनो के बिना हम अधूरे होते है। अगर हम किसी भी काम को करने के लिए प्रोपर समय का प्लान नहीं करते और …
नियम (रूल्स) का स्थान जीवन में सबसे ऊपर होता है। अगर हम स्वयं व परिवार दारा निर्धारित नियमों की पालना करेंगे और तय नियमों के अनुसार कर्म करेंगे, तों दैनिक कर्म में लक्ष्य और सफलता आसानी से पा सकते है। …
जीवन पथ पर रोज़ हमे नये दोर से गुजरना पड़ता है रोज़मर्रा की जिंदगी में अप्रत्याशित घटनाएं होना सामान्य बात है, और ऐसी स्थितियों में स्वयं के दारा किए गए निर्णय ही आगे का भविष्य तय करते है। जीवन में …
हमारे दुःख का मुख्य कारण स्वयं की आवश्यकता नहीं बल्कि हम अपनों का और दूसरे लोगो का मूल्याकंन करना, उनकी बुराई, आलोचना, निन्दा एवं ईर्ष्या में लीन रहना होता है और बेमतलब अपनों से जुड़े लोगो की चर्चा करते रहना …
हर इन्सान का सच्चा साथी और हर स्थिति में उसे संभालने वाला अगर कोई है तो वह स्वयं की इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास एवं भरोसा ही है। आत्मविश्वास (Will Power) एवं स्वयं पर किया गया भरोसा, हमारी समस्त चेतना और ऊर्जा को …
स्वयं या अपनों के माध्यम से बोले गये शब्द प्रभावित कर सकते है। हमारा दिमाग़ जो सोचता है उससे नया कोई कार्य और सुधार की विपुल सम्भावाना पनपती है और हम भविष्य में क्या करे इस विचार का मार्ग प्रशस्त …
हम हमारे जीवन में कितना भी धन- सम्पति, पॉवर, व नाम कमा लेवे और दैनिक जीवन कों जीने के लिए कितनी भी आधुनिक सुविधाजनक साधनों की व्यस्थापन कर लेवे लेकिन सुख-शांति नहीं पा सकते है। सुख-शांति पाने के लिए स्वयं …
अगर हम अपने स्वयं के काम कों अपने से जुड़े लोगों के ऊपर टालने की प्रवृत्ति की आदत बना लेते है तों यकीनन स्वयं के स्वावलंबन को नष्ट कर देते है और धीरें – धीरें स्वयं की योग्यता व कार्यक्षमता …
अहंकार और गलतफहमी इन्सानी सम्बन्धो के सबसें बड़े शत्रु होते है। अहकार होने के कारण मनुष्य को अपनों से उसका अहकार दूर कर देता है और अहकारी व्यक्ति बात- बात पर अपनों को बोलता रहता है… में ही योग्य हूँ …
हमे हमारे स्वयं के जीवन का आत्म विश्लेषण भी करना आवश्यक है। क्योंकि हम हमारा स्वयं का मूल्याँकन नहीं करते बल्कि लोग क्या कर रहें ,कैसे रह रहें है, और क्या काम व कमाई कर रहै है उसमे ध्यान रखने …
इन्सान कितना भी ज्ञानी, गुणी, होशियार, धनवान, पावरफुल और समझदार हों, कोई मायने नहीं रखता। क्योंकि कद्र उसके कार्य करने के तरीके और लोगो से किए जाने वाले व्यवहार से होती है। अत: काम ईमानदारी से करने पर फल जो मिलता …















