गलती (भूल ) जाने-अनजाने में भी हों ही जाती है। हम कितना भी प्रयास करे भूल होना स्वाभाविक होता है। जीवन में काम करेंगे तों गलती काम करने वाले इन्सान से दैनिक कर्म में हों जाती है हमे ऐसी भूलों …
अहंकार और गलतफहमी इन्सानी सम्बन्धो के सबसें बड़े शत्रु होते है। अहकार होने के कारण मनुष्य को अपनों से उसका अहकार दूर कर देता है और अहकारी व्यक्ति बात- बात पर अपनों को बोलता रहता है… में ही योग्य हूँ …
हमे हमारे स्वयं के जीवन का आत्म विश्लेषण भी करना आवश्यक है। क्योंकि हम हमारा स्वयं का मूल्याँकन नहीं करते बल्कि लोग क्या कर रहें ,कैसे रह रहें है, और क्या काम व कमाई कर रहै है उसमे ध्यान रखने …
इन्सान कितना भी ज्ञानी, गुणी, होशियार, धनवान, पावरफुल और समझदार हों, कोई मायने नहीं रखता। क्योंकि कद्र उसके कार्य करने के तरीके और लोगो से किए जाने वाले व्यवहार से होती है। अत: काम ईमानदारी से करने पर फल जो मिलता …
समय, सेहत और संबंध अमूल्य होते है ईनकी कोई कीमत नहीं लगा सकता है। जब हम समय, सेहत और संबंध इन्हें खो देते हैं तब इनकी कीमत का एहसास होता है और हम कितना भी पैसा खर्च कर लेवे फिर …
ईर्ष्या व द्वेष करने वाला इन्सान ही दुःखी रहता है और बेवजह स्वयं का जीवन खराब कर लेता है
जीवन जीने के देनिक कर्म में स्वयं के विल् पावर कों स्ट्रॉंग रखना होगा अन्यथा भय, कुंठा, तनाव एवं असुरक्षा की भावना हमे कमजोर बनाती जाएगी ।
हमारे जीवन में नकारात्मक सोच और बातै अनतः होती है और यें दैनिक जीवन में रोज़ सुनने को मिलती है ।
जीवन जीने में धैर्यवान होना व्यक्ति कों मज़बूत बनाता रहता है और किसी भी प्रकार की विषमताओं से निपटने के लिए अपने आप् पर दृढ़ विश्वास को बनाये रखता है ।।
मन और तन अगर मनुष्य का ठीक होता है तों ही वों कर्म कर पाता है ।। हर इन्सान कों मन स्थिर रखना होता है अगर मन स्थिर होगा तों ही किसी काम का निर्णय कर पाएगा और निर्णय होने …
अगर हम अपने स्वयं के काम कों अपने से जुड़े लोगों के ऊपर टालने की प्रवृत्ति की आदत बना लेते है तों यकीनन स्वयं के स्वावलंबन को नष्ट कर देते है और धीरें-धीरें स्वयं की योग्यता व कार्यक्षमता कों कमजोर …
अगर हम हमारे स्वयं के जीवन में संयम,सादगी,साधना, संस्कार, निरोगी काया, मन में शान्ति एवं कर्म परिश्रम के साथ करते रहने की भावना रखते हैं तों हम सफलता एवं समृध्दि को आसानी से प्राप्त कर लेते है ।। अगर हम …
भगवान द्वारा प्रदत्त हमारा जीवन एक मूल्यवान उपहार है हमे हमारे जीवन कों अमूल्य मानते हुए सत्कर्म करने चाहिए ।। हमे जीवन कों बेहतर तरीके के साथ सादगी के साथ जीना चाहिए और जीवन कों साधारण ढंग से न लेंकर …















