जीवन जीने के दैनिक कर्म में व्यवहारिक बातचित चर्चाओं मैं अगर हम् सरलता ,कुशलता के साथ और साफ़-सुथरीं बात अगर हम् करेंगे तों ही अपने से जूड़े लोग़ो का साथ ले पायेंगे। क्योंकि आजकल किसी कों फर्क नहीं पड़ता आप …
प्रसन्न रहना हर इन्सान की महान उपलब्धि होती है। जो भी इन्सान प्रसन्न रहना हर हालत में सीख लेता है तों ही जीवन के हर पल का आनन्द ले पाता है। जैसे बीमारी के समय अगर हम मुस्कुराते रहते है तों …
हम हमारे जीवन में कितना भी धन- सम्पति, पॉवर, व नाम कमा लेवे और दैनिक जीवन कों जीने के लिए कितनी भी आधुनिक सुविधाजनक साधनों की व्यस्थापन कर लेवे लेकिन सुख-शांति नहीं पा सकते है। सुख-शांति पाने के लिए स्वयं …
अगर हम अपने स्वयं के काम कों अपने से जुड़े लोगों के ऊपर टालने की प्रवृत्ति की आदत बना लेते है तों यकीनन स्वयं के स्वावलंबन को नष्ट कर देते है और धीरें – धीरें स्वयं की योग्यता व कार्यक्षमता …
अहंकार और गलतफहमी इन्सानी सम्बन्धो के सबसें बड़े शत्रु होते है। अहकार होने के कारण मनुष्य को अपनों से उसका अहकार दूर कर देता है और अहकारी व्यक्ति बात- बात पर अपनों को बोलता रहता है… में ही योग्य हूँ …
इन्सान कितना भी ज्ञानी, गुणी, होशियार, धनवान, पावरफुल और समझदार हों, कोई मायने नहीं रखता। क्योंकि कद्र उसके कार्य करने के तरीके और लोगो से किए जाने वाले व्यवहार से होती है। अत: काम ईमानदारी से करने पर फल जो मिलता …
आधुनिक युग में आजकल संबंधो से अधिक धन- सम्पति कों प्राथमिकता दी जाती है और आम तौर पर पाया जाता है की पैसे वाला इनसान अगर गलती भी करे तों बोला जाता भूल हों गई होगी यें तों ऐसा कर …








