हम जो जीवन जीते है उसपर संगति का बहुत अधिक प्रभाव होता है अगर गलती से भी साथ जुड़े लोगों में एक इन्सान भी ग़लत मिल गया तों उसकी संगत व आचरण से हमारा भी नाम और कर्म खराब हों …
हम कभीं भी हमारे जीवन में रिश्तें व मित्रता कों खरीद नहीं सकते हैं, और ना ही उधार पा सकतें है। रिश्तें व मित्रता तों आपसी सम्पर्क व एक दूसरे का ध्यान रखनें से बनते है।। अगर समय – समय …


