हमारे दुःख का मुख्य कारण स्वयं की आवश्यकता नहीं बल्कि हम अपनों का और दूसरे लोगो का मूल्याकंन करना, उनकी बुराई, आलोचना, निन्दा एवं ईर्ष्या में लीन रहना होता है और बेमतलब अपनों से जुड़े लोगो की चर्चा करते रहना …
जीवन में हर व्यक्ति कों वक़्त मिलता है ज़िन्दगी बदलने के लिए और जैसा वों कर्म करता है उसके अनुरूप उसको प्रतिफ़ल मिल जाता है।। लेकिन हर इन्सान कों ध्यान रखना चाईयें ज़िन्दगी दुबारा नहीं मिलती वक़्त बदलने के लिए। …


