हमारे दुःख का मुख्य कारण स्वयं की आवश्यकता नहीं बल्कि हम अपनों का और दूसरे लोगो का मूल्याकंन करना, उनकी बुराई, आलोचना, निन्दा एवं ईर्ष्या में लीन रहना होता है और बेमतलब अपनों से जुड़े लोगो की चर्चा करते रहना …
स्वयं या अपनों के माध्यम से बोले गये शब्द प्रभावित कर सकते है। हमारा दिमाग़ जो सोचता है उससे नया कोई कार्य और सुधार की विपुल सम्भावाना पनपती है और हम भविष्य में क्या करे इस विचार का मार्ग प्रशस्त …
हम हमारे जीवन में कितना भी धन- सम्पति, पॉवर, व नाम कमा लेवे और दैनिक जीवन कों जीने के लिए कितनी भी आधुनिक सुविधाजनक साधनों की व्यस्थापन कर लेवे लेकिन सुख-शांति नहीं पा सकते है। सुख-शांति पाने के लिए स्वयं …
भगवान द्वारा प्रदत्त हमारा जीवन एक मूल्यवान उपहार है हमे हमारे जीवन कों अमूल्य मानते हुए सत्कर्म करने चाहिए ।। हमे जीवन कों बेहतर तरीके के साथ सादगी के साथ जीना चाहिए और जीवन कों साधारण ढंग से न लेंकर …
समय सदैव एक समान नहीं होता समय बदलता रहता है। जिस प्रकार प्रकति में दिन एवं रात होने का नियम होता है उसी प्रकार हर इन्सान का समय एवं कर्म में भी परिवर्तन होता है। ध्यान रहें समय के साथ …
किसी भी व्यक्ति कों कर्म का फल पलक झपकते ही प्राप्त नहीं हो सकता है इसके लिए समय देना पड़ता है और समय देने के बाद भी परिणाम नहीं मिले तो धैर्य रखना पड़ता है और लगातार प्रयास पर प्रयास …
अगर हम जीवन में एक दृढ़ लक्ष्य व उद्देश्य तय कर लेते है, तो हमे मेहनत व कर्म करने की आवश्यकता होतीं है। लक्ष्य प्राप्ति के लिये किसी ओर सहारे की ज़रूरत नहीं होतीं है केवल इसके लिये हमे अपना …








