जीवन अपार संभावनाओं का नाम होता है भगवान ने हमे जो शक्ति, बुद्धि, समझ, विवेक दिया है उससे हम हमारे जीवन में जो सोचगे वों पा सकते है। हमे हमारे सपने पूरे करने के लिए सर्वप्रथम स्वयं पर विश्वास करना …
अगर इन्सान संयम के साथ जीवन जी सक़ता हे तो संयमित जीवन में हर दृष्टि से लाभ ही लाभ है। अगर हम खानपान पर अंकुश लगाने का साहस कर लेवे तो बीमारी से बच सकते हैं और जीवन में जब …
अगर हम अपनी आदतें बदल सकते है तों आदतें निश्चित रूप से आपका भविष्य बदल सकती है। आदतें बदलने से हम हमारी कार्य – क्षमता का सदुपयोग कर पाते है और जैसे ही हमारी नया करने की आदतें होती जाती …
समय सदैव एक समान नहीं होता समय बदलता रहता है। जिस प्रकार प्रकति में दिन एवं रात होने का नियम होता है उसी प्रकार हर इन्सान का समय एवं कर्म में भी परिवर्तन होता है। ध्यान रहें समय के साथ …
हम जो जीवन जीते है उसपर संगति का बहुत अधिक प्रभाव होता है अगर गलती से भी साथ जुड़े लोगों में एक इन्सान भी ग़लत मिल गया तों उसकी संगत व आचरण से हमारा भी नाम और कर्म खराब हों …
किसी भी व्यक्ति कों कर्म का फल पलक झपकते ही प्राप्त नहीं हो सकता है इसके लिए समय देना पड़ता है और समय देने के बाद भी परिणाम नहीं मिले तो धैर्य रखना पड़ता है और लगातार प्रयास पर प्रयास …
किसी भी इन्सान को अपना बनाना और पराया करना हमारे स्वयं के हाथ होता है। अगर हमारी सोच और नियत दोनों ठीक होती है तों हमे कैसा भीं इन्सान मिले उससे सहयोग ही मिलता है। लेकिन अगर हम केवल स्वयं …
अगर हम दुखों कों याद कर दुखों को गिनने बैठ जाएँगे तों जीवन में ना तों गिनती पूरी होगी और बिना मतलब और अधिक दुःखी हों जाएँगे। दुःख कों जीवन में भुलाना होता है और पुराने दुखों से केवल समझ …
प्रसन्नता और मुस्कराहट साधनों से नहीं आती और ना ही खरीदी जा सकतीं है। प्रसन्नता और मुस्कराहट सदैव साथ निभाये इसके लिए स्वयं के मन और विचारों पर कंट्रोल्स करना होगा और विचारों कों शुद्घ रखना होगा। स्वयं के जीने …
आधुनिक युग में आजकल संबंधो से अधिक धन- सम्पति कों प्राथमिकता दी जाती है और आम तौर पर पाया जाता है की पैसे वाला इनसान अगर गलती भी करे तों बोला जाता भूल हों गई होगी यें तों ऐसा कर …
अगर हम समर्थ है तों हमे समर्थता का सदुपयोग करना चाहिए और यथा सम्भव दूसरे लोगो की मदद करनी चाहिए और धन का सदुपयोग समाज व परिवार की भलाई में करना चाहिए। अगर हम योग्य इन्सान है और अतिरिक्त काबिलियत …
अगर हमे जीवन में समस्या को आमंत्रण नहीं देना है और हमे अगर समस्या से दूर रहना है तों बिना सोचे समझें कार्य करना बन्द करना होगा साथ ही ध्यान रखना होगा। अति आनन्द के समय निर्णय नहीं करना। क्यों …
अगर हमारे स्वभाव में दूसरे लोगों से ईर्ष्या ओर घृणा करने वाला होता है। तों हर बात व्यवहार में हम् असंतुष्ट, क्रोधी, ओर शंकाशील हों जाते है जिससे हमारे मन व् जीवन में सदा दुःखी ही रहते है और हमारा दिमाग़ …















